मुख्य संपादक दशरथ सिंह कट्ठा
झाबुआ….विद्या भारती सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान मालवा प्रांत धार विभाग का पहला सेवक सेविका सम्मेलन सरस्वती शिशु मंदिर मेघनगर में आयोजित किया गया 23 मार्च को प्रथम उद्घाटन सत्र में अतिथि अंबिकादत्त कुंडल विभाग समन्वयक धार,क्षेत्रीय संयोजक संस्कृति बोध परियोजना बलिराम बिल्लौरे,वर्ग संयोजक प्राचार्य आलीराजपुर धनराज काग,महाप्रबंधक प्रधानाचार्य मेघनगर और श्री मती कल्लु निनामा दीदी सेवा भारती पूर्णकालिक मंचासीन रहे उद्घाटन सत्र में विभाग समन्वयक कुंडल ने चर्चा सत्र में हम यहां क्यों आए ? इस विषय पर चर्चा की आपने सेवक/सेविका को सरस्वती शिशु मंदिर योजना से परिचय कराया शिशु मंदिर योजना के उद्देश्य आदि विषयों पर मार्गदर्शन किया द्वितीय सत्र में वर्ग संयोजक बलिराम बिल्लौरे ने विद्यालय में करणीय कार्य क्या-क्या होते हैं इस पर आपका मार्गदर्शन मिला जिसमें विद्यालय की SOP तैयार करना समय पर और समय का पालन करना, लेखा बस्ता संधारण और क्रियान्वयन करना भौतिक सत्यापन करना आदि विषयों पर चर्चा की गई।तृतीय सत्र में विभाग समन्वयक अंबिकादत्त कुंडल ने अपने कार्य में कुशलता कैसे आए ? इस पर आपने सेवक सेविका का मार्गदर्शन किया चतुर्थ सत्र संध्यावंदन और रामायण व महाभारत पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता जिसमें सही उत्तर देने वाले प्रतिभागी को उपहार भेंट किया गया षष्ठ सत्र में अभिव्यक्ति भजन और गीत पर सभी ने सहभागिता की तो वही 24 मार्च मंगलवार को देवदर्शन हनुमान जी मंदिर पीपलखूंटा जाकर किया सप्तम सत्र में सुंदरलाल शर्मा सह प्रांत प्रमुख जी का मार्गदर्शन मिला जिसमें आपने सेवक/सेविका का कार्यकाल की समीक्षा की क्या हमारे स्वयं के भी भैया/बहिन शिशु मंदिर में पढ़ने आते या पढ़कर चले गए और अगर छोटे है तो उनका अध्यापन हमारे शिशु मंदिर में करे जिस प्रकार संगम त्रिवेणी धाम है जिसमें गंगा यमुना और सरस्वती नदी के मिलने से उसमें स्नान करने से सभी का उद्धार हो जाता है उसी प्रकार हमारा शिशु मंदिर भी संगम का त्रिवेणी धाम जिसमें गंगा की भूमिका हमारे प्रधानाचार्य यमुना की भूमिका हमारे कार्यालय के लेखापाल और जिस प्रकार गुप्त रहते हुए सरस्वती नदी की भूमिका में होती है उसकी भूमिका हम सभी सेवक/सेविका निभाते है।अप्रैल माह के बाद सभी का अवकाश लग जाता है लेकिन हमारी शिशु मंदिर की त्रिवेणी का कोई अवकाश नहीं लगता है हम सभी का प्रधानमंत्री जी योजना के बीमा होना चाहिए नहीं है तो तुरंत विद्यालय जाकर इसकी चिंता करना हमारे संगठन का नाम विद्या भारती है,हम सभी विद्या भारती ही है क्योंकि हम विद्या भारती के कार्यकर्ता है अंत में आपने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित की अंतिम सत्र में अतिथि विभाग समन्वयक अंबिकादत्त जी कुंडल रहे सभी ने अपने अनुभव कथन सुनाए विभाग समन्वयक अंबिकादत्त जी कुंडल ने समापन सत्र में कहा कि हमारे कार्य हमेश माता शबरी के जैसे होना चाहिए जैसे उन्होंने उनके गुरु ने कहा था कि प्रभु श्री राम जी आयेंगे लेकिन कब आयेंगे ये नहीं बताया था फिर उन्होंने अपने गुरु का उपदेश मानकर नित्य स्वागत की तैयारी में रहती थी अंत में प्रभु श्रीराम जी आए और उन्हें नवधा भक्ति का उपदेश दिया हमारी सनातन संस्कृति के तीन कार्यों में हमारे जीवन में कर्म योग ही महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्म योग ही हमारी साधना है तथा हमारा कर्म ही सेवा है हर समस्या का समाधान हमारे अंदर ही होता है बस उसको जानने की आवश्यकता है आपने शंकराचार्य और तोटकाचार्य,महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत एकनाथ,संत रैदास और तुलसीदास जी के प्रथम मिलन के वृतांत के बारे में बताया जो समर्पण के भाव पैदा करने की शिक्षा देते है शिशु मंदिर को ईश्वरीय कार्य बताया हम सभी को विद्यालय में प्रार्थना में सम्मिलित होना चाहिए जिससे हमारे ग्रह दोष दूर होते है वर्ग संयोजक बलिराम जी बिल्लौरे ने आभार माना वर्ग की संचालन टोली जिसमें वर्ग संयोजक बलिराम जी बिल्लौरे प्राचार्य आलीराजपुर वर्ग महाप्रबंधक धनराज काग प्रधानाचार्य मेघनगर वर्ग बौद्धिक प्रमुख शिवराम जी खंडहर प्रधानाचार्य पेटलावद,वर्ग सह बौद्धिक प्रमुख राहुल लववंशी,प्रधानाचार्य धार, मुख्य सचेतक विनोद जी माली प्रधानाचार्य जोबट , वंदना और सेविका आवास प्रमुख श्री मती नीता घूमरे प्रधानाचार्य राणापुर तथा सहप्रबंधक व आपूर्ति प्रमुख देवराज जी चन्द्रवंशी प्रधानाचार्य पारा पूर्ण समय उपस्थित रहे और वर्ग को संचालित करने में सहयोग किया



