मुख्य संपादक दशरथ सिंह कट्ठा झाबुआ
झाबुआ…स्वतंत्रता दिवस जैसा राष्ट्रीय पर्व भी जनपद पंचायत मेघनगर में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। दशहरा मैदान में हुए 15 अगस्त के आयोजन पर ₹2.38 लाख से अधिक खर्च दिखाया गया, लेकिन न व्यवस्था नजर आई, न पारदर्शिता। बारिश के बीच बच्चे और अतिथि भीगते रहे और जनपद के अधिकारियों कैसे साठगांठ कर लाखों रुपयों का बिल लगवा कर पास करवा दिए गए जब की पूरे कार्यक्रम में पानी फिर गया था वहीं देखा जाय तो इतना सामन लगा भी नहीं था तो फिर ये इतना बड़ा बिल कैसे लगा दिया..? जनपद मेघनगर में कितने इस तरह के बिल और लगे होंगे अगर इस की जाँच करे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा कि अधिकारी किस तरह से भ्रष्टाचार कर सरकार को लाखों रुपयों का चुना लगा रहे हैं

₹5 हजार के किराए के गमले में ही उड़ा दिए सरकारी पैसे
कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के नाम पर जनपद ने सिर्फ 10 गमलों पर ₹5000 का खर्च दिखा दिया। यानी प्रति गमला ₹500 का किराया! स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने में तो नए गमले खरीद लिए जाते, जो भविष्य में उपयोगी भी रहते लेकिन जनपद ने बिना सोचे-समझे भुगतान कर दिया — जैसे सरकारी धन व्यक्तिगत संपत्ति हो

बैठक में तय हुआ वॉटरप्रूफ टेंट, लेकिन सब नदारद
आयोजन से पहले हुई बैठक में एसडीएम की अध्यक्षता में वॉटरप्रूफ टेंट लगाने का निर्णय लिया गया था। इसके बावजूद जनपद अधिकारियों ने सस्ते और घटिया टेंट लगवाए। नतीजा यह हुआ कि बारिश शुरू होते ही पूरा मंच और दर्शक क्षेत्र पानी में भीग गए बच्चे, अतिथि, और शिक्षक सभी परेशान हो गए।
व्यवस्था फेल, फिर भी पूरे बिल पास
कार्यक्रम की अव्यवस्था पर लोगों ने शिकायतें भी दर्ज कराईं, परंतु जनपद अधिकारियों ने बिना जांच किए पूरे बिल पास कर दिए। सवाल उठता है कि जब कार्यक्रम ही असफल रहा, तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
जनपद सीईओ का बचाव आगे सुधार होगा
जब इस पूरे मामले पर जनपद सीईओ सुश्री प्रज्ञा साहू से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा —
“मैंने हाल ही में जॉइन किया है। बेहतर व्यवस्था के निर्देश दिए थे, लेकिन टेंडर न आने से पुराने सप्लायर को ही काम देना पड़ा। अगली बार समय रहते टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
अब निगाहें जिला कलेक्टर पर — होगी जांच या फिर दब जाएगा मामला?
जनपद के इस आयोजन में खुली लूट और जवाबदेही के अभाव से जनता में नाराजगी है। अब सभी की नजरें जिला कलेक्टर झाबुआ पर टिकी हैं — क्या वे जांच के आदेश देंगे, या यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत स्तर पर फैला यह भ्रष्टाचार अगर नहीं रुका, तो लोगों का प्रशासन पर से भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।



