मुख्य संपादक दशरथ सिंह कटठा
झाबुआ…बाहुल्य आदिवासी जिलों में लोक संस्कृति का पर्व भगौरिया की शुरुआत 18 मार्च से झाबुआ और आलीराजपुर जिले में हो रही हैं पूरे सप्ताह हाट बाजारों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। हाट बाजारों में आदिवासियों की सांस्कृति एक सुंदर नजारा नजर आएगा। ढोल,मादल की गूंज और हुलास के साथ थाली की गूंज सुनाई देगी तो मेले में आदिवासी युवाओं और युवतियों की टोलियां इस उत्सव के उत्साह उमंग में दिखाई देंगी। जिले का ये भगौरिया उत्सव देशभर में प्रसिद्ध है। इसे देखने के लिए बाहर से भारी संख्या में सैलानी आते हैं। तो वही इस में कई विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं और पर्व का आनंद लेते है यहाँ धुलेंडी से पहले के सात दिन भगौरिया हाट बाजार लगते हैं। जहां आदिवासियों की लोक संस्कृति की झलक दिखाई देती है

आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता की झलक देखने को मिलती है भगौरिया में
भगौरिया मेले में आदिवासी लोकसंस्कृति के रंग नजर आते हैं। भगौरिया पर्व की तारीख आते ही जगह-जगह पर भगौरिया हाट को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती है मेलों में आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता की झलक देखने को मिलती है कहा जाता है कि आदिवासियों के जीवन में यह उत्साह और उल्लास का पर्व है और भगौरिया उत्सव के लिए बाहर से आदिवासी अपने घर आते हैं होली के सात दिन पहले मनाए जाने वाले इस भगौरिया उत्सव में आदिवासी समाज डूबा रहता है इन सात दिनों के दौरान आदिवासी समाज के लोग खुलकर अपनी जिंदगी जीते हैं कहा जाता है कि देश के किसी भी कोने में मजदूरी कर ने के लिए गया आदिवासी भगौरिया उत्सव पर अपने गांव लौट आता है घर पहुंचने के बाद ये लोग हर दिन परिवार के साथ भगौरिया मेले में जाते हैं मेले का नजारा खूबसूरत होता है पूरे दिन भगौरिया मेलों में रंगारंग कार्यक्रम आयोजित होते हैं इसलिए भगौरिया को उल्लास का पर्व भी कहा जाता है आदिवासी समाज के लोग सात दिनों तक अपनी जिंदगी अपने अंदाज में अपनी मस्ती में जीते हैं
भगौरिया की शुरुआत राजा भोज के समय हुई थी
बताते है कि उस समय दो भील राजाओं कासूमरा और बालून ने अपनी राजधानी में भगोर मेले का आयोजन शुरू किया था इसके बाद दूसरे भील राजाओं ने भी अपने क्षेत्रों में इसका अनुसरण शुरू कर दिया उस समय इसे भगोर कहा जाता था वहीं स्थानीय हाट और मेलों में पहुँचे वाले लोग इसे भगौरिया कहने लगे इसके बाद से ही आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भगौरिया उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जा हैं यहाँ इस भगोरिया मेलों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है आदिवासी लोगों की अलग-अलग टोलियां मेले में बांसुरी,ढोल और मांदल बजाते नजर आते हैं इस दौरान आदिवासी लड़कियां भी मेले में सजधज कर आती हैं वह पूरी तरह से अपनी पारंपरिक वेश-भूषा में नजरे आती हैं ओर मेले में हाथों पर टैटू गुदवाती हैं भगौरिया मेले के दौरान खाने के लिए भी अलग-अलग चीजें मिलती हैं विशेष रूप से गुड़ की जलेबी,भजिया,पान और ताड़ी की डिमांड ज्यादा रहती है मेले में आए लोग अलग-अलग आदिवासी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं
झाबुआ-आलिराजपुर जिले में कब कहां किस दिन भगौरिया मेले लगेंगे देखें सूची
18 मार्च 2024 सोमवार को
आलीराजपुर जिले में अलीराजपुर,आजाद नगर, बड़ागुड़ा,कुंडवाट…
झाबुआ जिले में पेटलावद, रंभापुर,मोहनकोट,कुंदनपुर, रजला, मेडवा, झिरी बगासा
19 मार्च 2024 मंगलवार को
आलीराजपुर जिले में बखतगढ़, आम्बुआ…
झाबुआ जिले में थांदला, पिटोल,खयंडू,तारखेड़ी,बरवेट, अंधरवाड़ा…
20 मार्च 2024 बुधवार को
आलीराजपुर जिले में बरझर, बोरी,खट्टाली,चांदपुर,मथवाड़…
झाबुआ जिले में उमरकोट, माछलिया,करवड,बोडायता, कल्याणपुरा,मदरानी,ढेकल, कंजावानी…
21 मार्च 2024 गुरुवार
आलीराजपुर जिले में जोबट, फुलमाल,सोंडवा…
झाबुआ जिले में पारा,हरीनगर, सारंगी,समोई,चैनपुरा…
22 मार्च 2024 शुक्रवार को
आलीराजपुर जिले में वालपुर, कठ्ठीवाड़ा,उदयगढ़
झाबुआ जिले में भगोर,बेकल्दा, मांडली,कालीदेवी…
23 मार्च 2024 शनिवार को
आलीराजपुर जिले में नानपुर, उमराली,बलेड़ी…
झाबुआ जिले में राणापुर, मेघनगर,बामनिया,झकनावदा…
24 मार्च 2024 रविवार को
आलीराजपुर जिले में छकतला, कुलवट,सोरवा,आमखुट, कनवाड़ा,झीरण…
झाबुआ जिले में झाबुआ, रायपुरिया,काकनवानी में होंगे भगोरिया मेला…



